Path to humanity

Path to humanity
We cannot despair of humanity, since we ourselves are human beings. (Albert Einstein)

Tuesday, September 18, 2012

गीली रेत...Lost name...


जैसे मैं तुमसे मिला नहीं
जो भी है, पर ये सच तो नहीं।
लौटकर फिर वापिस आये तुम
गीली रेत पर लिखे नाम ढूंढते
पर वो तो कब का मिट चुका
छोटे बच्चों के पैरों तले
या कभी उनकी ख़ुशी का घरोंदा बनके
जोड़े थे जिन सपनों के तिनके
हाँ वो हर बार टूट जाता था
पर फिर से जुड़ने के लिए
दोष नहीं ये किसी का भी
सीमाओं की आड़ लिए

जब मैं तुमसे पहली बार मिला
चुप था, हौले से मुस्काया था
बचपन से जो सपना देखा था
उसको जीभर के गले लगाया था
बेफिक्र था अपनी मस्ती में
सोकर भी जगता रहता था
कोयल सी मीठी बोली सुन
रोकर भी हँसता रहता था
ये सब सच है, पर दूर हो तुम
मैं टूटा हूँ पर खुश भी हूँ
इन कोमल खुशियों की छांव में
हँसता हूँ, बस और क्या कहूँ

Monday, September 17, 2012

मूक कहानी...Story without words...



बिन शब्दों के कहता वो मुझसे
सुन लो मेरी मूक कहानी
बात पुरानी बीत गयी जो
दिल ने मेरे सच है मानी
छोटे कोमल हाथों को छूकर
मैंने तेरा मन पहचाना
उन गहरी आँखों के अन्दर
दुनिया देखी सच को जाना

बातें तुमसे करता था जब
बिन शब्दों के बस चुप रहकर
तुमने भी तो गले लगाया
मुझको अपना जीवन कहकर
मेरा साथी है हर पल का
माथे का वो निशान तुम्हारा
इन आँखों की नमी को सुनकर
शब्दों से ये मन है हारा।

Sunday, September 16, 2012

Elizabeth Gilbert: Your elusive creative genius

मीठी यादें...Sweet Memories...


तुमसे है मेरी सुबह, तुमसे है मेरी हर शाम
तुम बिन एक पल भी जियूं, है नहीं आसां
रात वो काली बीत गयी, उन मीठी यादों के सहारे
पर ऐसा क्यूँ हुआ, क्यूँ हम इस वक़्त से हारे
तुझमें जिया है जीवन मैंने, सपना सच्चा प्यारा सा
तुम नहीं हो पास मेरे अब, पर मैं हूँ तुम्हारा सा
याद तेरी सुकून है मेरा, कंधे पर वो सर रख लेना
तेरे कोमल पैरों को छूकर, आँखों से नदियों का बहना

तुमसे ही है जीवन मेरा, तुमसे है दिल का आराम
तुम बिन एक पल भी जियूं, है नहीं आसां
तुमसे बातें करके अब मैं, हंस भी तो लेता हूँ
आँखें बंद किये बस सपनों में खोया रहता हूँ
कल तेरे हाथों को छूकर, अन्दर तक कुछ कुंहक उठा
आँख खुली तो देखा मैंने, हाथ गुलाबी महकता सा
याद तेरी आस है मेरी, दुनिया पूरी होने की
सुन लो मुझको बस एक पल को, आँखों की ये भरी नदी!!

Sunday, September 9, 2012

कितने दिन बीत गए...Days are gone...


इस मुलायम घास पर चले
कितने दिन बीत गए
लगता है,
जैसे ये कल की ही तो बात है
पहले पहल मैं सोचता
पैरों में ये ठंडी नमी सी क्यूँ है
किसी ने कहा-
रात, सारी रात रोती रही
अपनी सारी नमी को
ओस की बूंदों का रूप देकर
घास पर संजोती रही
फिर लगता,
किसी के आंसुओ को
यूँ पैरों तले रौंदना
'उसे' कितना दर्द देता होगा
आंसुओ की सारी शीतलता
पैरों को छूकर, मन तक पहुँचती थी
ये एहसास, रात का सुकून है
पर रात तो काली है
सुकून देना उसके बस की बात नहीं
भ्रम था ये मेरा-
रात न होती तो सुबह क्यूँ आती
दोनों हैं बस एक पल के साथी
सुबह शीतल है
तो रात शांति का रूप है
इसकी ये नमी
फिर एक बार घास पर उतर आई है
पर मेरी हिम्मत नहीं
इस पर चलने की
और शायद अब इसकी
कोई ज़रूरत भी नहीं

Saturday, September 8, 2012

Love was so far, I was in hate...



I feel so lost, I am so confused.
Destiny made it hard or I am so rude?
Life was so true, I was no wrong.
It happened like a moment, I was no strong.
Love was so far, I was in hate.
It stabbed my heart; deep and straight.
Light was so dim, I had a hope.
Shine will be mine, rest is just mock.

I was no bad, Devil was in me.
Right from the start, its written destiny.
Bad was my mind, Heart is serene God.
Both had a fight, I couldn't even thought.
You were my smile, You are my pride.
All I did was wrong, You should have at least tried.
Now, I feel so cold. I need your hug.
Your warmth will shield, me and my breath.

Sunday, September 2, 2012

कल रात मैंने एक सपना देखा..I saw a dream...

कल रात मैंने एक सपना देखा
तुझे होता मैंने अपना देखा
लाल जोड़ा पहने तू  परी लग रही थी
मुझे बिन कहे सब कुछ कह रही थी
थोड़ा सा लजाती, थोड़ा शर्माती
कभी जाती दूर, कभी पास आती
हौले से छू लूँ तुझे, दिल कह रहा था
सोते हुए ही सही, सपना सच हो रहा था
निभा दूँ वो वादा जो तुझसे किया था
लुटा दूँ वो जीवन, जो तुझमें जिया था
तेरे हांथों को छूकर, जहाँ मिल गया था
मेरा साथ तुझसे सदा जुड़ गया था
तेरे हांथों की मेहँदी सुकून लग रही थी
तेरे माथे की बिंदिया क्या कहूँ लग रही थी
चूड़ियों की खनखन में संगीत घुला था
तेरा साथ पाकर मैं पूरा हुआ था
सपनों की बातें तो सच भी हैं होती
बिन सपनों की दुनिया अधूरी ही होती
ये रात, काश थोड़ी लम्बी सी होती
ये सपना न होता, तू मेरी ही होती
कल रात मैंने एक सपना देखा
तुझे होता मैंने अपना देखा

जीतना है श्रीराम तुमसे...I will win, God...

क्या ये गलत है
कि मुझे विश्वास है अपनी जीत का
हारना तो नियति थी
पर मुझे आस है अपनी प्रीत का|
उस गर्भ में छिपा रहस्य
नहीं जानना मुझे
लड़ना पड़ा, तो लड़ जाऊंगा
हे राम! तुझसे|
कहा था तुमने दोगे मेरा साथ
हर तपती राह पर
और रखोगे सर पर हाथ
मेरी हर आह पर|
वचन तुम्हारा क्यूँ धूमिल हुआ
क्यूँ मौन हो प्रभु राम तुम
शक्ति नहीं थी तुममे, तो कह देते
मैं इंसान हूँ, और भगवान् तुम?
भय नहीं मुझे तुमसे
परख लो धैर्य मेरा, हे धैर्यवान!
हारना नियति रही होगी
अब जीतना है मुझे तुमसे श्रीराम|
कोई राह नहीं, कोई चाह नहीं
घने अँधेरे की कोई थाह नहीं
थोडा मद्धम तो होता हूँ, पर
लौटने की दिखती कोई वजह नहीं|

I miss you, the real 'You'



I miss you, the real 'You'
it doesn't mean that you are changed
It happened, b'coz it had to
life should never be blamed.

You are my shine, my darling,
my life line.
I know its broken now-
but its just Time.

Life has a rule
- it has to reach an end.
We are mere human
not the one who breaks this trend.

Sure, I am
we will again be together, here or up in the sky.
You might change, I am not
I may fail, but I will try and I will fly.

बिखरी यादें...Memories...


बिखरी यादें मेरी तुमसे हैं
हर इक महकती शाम सी
कह दो कुछ, हम सुनते रहें
क्यूँ हो अब अनजान सी
हर पल में समाया है वो सिलसिला
जब जब तुमने मुझको छुआ
अब हम भी तुमसे क्या कहें
हो क्यूँ अब तुम बेजान सी
भीड़ भरी इस दुनिया में
हर इंसान अकेला बैठा है
यादों की गहरी घाटी में
मिलती नहीं मेरी सांसें कहीं
ठंडी हवा की ओट लिए
ये तूफ़ान समझ ना पाया मैं
साँसों बिन कोई कैसे जिए
कह दो तुम जो कहा नहीं...