Path to humanity

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We cannot despair of humanity, since we ourselves are human beings. (Albert Einstein)

Sunday, August 10, 2014

फिर याद आयी यारों की यारी- Friends Forever


आज फिर याद आयी यारों की यारी
वो ज़िन्दगी हमारी मस्ती से भरी
पुराने किस्सों में बीतें रातें हमारी
बेफिक्र होकर जीने की ज़िद वो हमारी
बारिश की बूंदों से वो भिगोना तुम्हे
खुद भी गिरना और गिराना तुम्हे
और बस हँसकर भुला देना वो भूलें हमारी
आज फिर याद आयी यारों की यारी

तुम्हारे साथ रातों में तारों को गिनना
और फिर छोटे बड़े सपनों को बुनना
हाथों में हाथ डाल दूर हुई मुश्किलें हमारी
आज फिर याद आयी यारों की यारी
आज अलग ही सही पर जुड़ीं हैं राहें हमारी
कुछ तुम चलो, कुछ हम चलें- मिटा दें ये दूरियां सारी
दोहराएंगे फिर किस्से पुराने, बातें सुहानी
दुआ करें कभी ना टूटे ये यारी हमारी
आज फिर याद आयी यारों की यारी

                                                                        --Neha Bakshi

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© Snehil Srivastava

1 comment:

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