Path to humanity

Path to humanity
We cannot despair of humanity, since we ourselves are human beings. (Albert Einstein)

Saturday, October 11, 2014

बस प्रतिमान बदल गये हैं My Love Is Changed


यदि अब मैं तुम्हे
नभ की तारिका नहीं कहता
या कली वगैरह
अर्थ ये नहीं
कि मेरा प्यार झूठा है
बल्कि प्रतिमान बदल गये हैं

अधरों की कान्ति
जब मध्धम मध्धम सी है
जिन पर मेरे गीत
मुस्कुरा उठते थे
तुम्हारे बदन की
आड़ी तिरछी सी रेखाएं
जो मेरे शब्दों से भी अधिक
सुकोमल हुआ करती थीं
प्रिये, मुझे तुम्हारे हृदय से
आज भी उतना ही प्यार है
अर्थ ये नहीं
कि मेरा प्यार झूठा है
बल्कि प्रतिमान बदल गये हैं

तुम्हारे शब्दों में
अभी भी उतनी ही कोमलता है
जो मेरे हृदय को
असीम शांति का एहसास कराते हैं
और तुम्हारी छुअन की गर्माहट
बारिश में
कंपा देने वाली ठण्ड से
मुक्त करती है
मेरा विश्वास करो प्रिये
"मैं अकेला जरुर हूँ पर आज भी वही हूँ"
अर्थ ये नहीं
कि मेरा प्यार झूठा है
बल्कि प्रतिमान बदल गये हैं

Picture credit: www.abstract.desktopnexus.com

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© Snehil Srivastava

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