Path to humanity

Path to humanity
We cannot despair of humanity, since we ourselves are human beings. (Albert Einstein)

Sunday, September 2, 2012

कल रात मैंने एक सपना देखा..I saw a dream...

कल रात मैंने एक सपना देखा
तुझे होता मैंने अपना देखा
लाल जोड़ा पहने तू  परी लग रही थी
मुझे बिन कहे सब कुछ कह रही थी
थोड़ा सा लजाती, थोड़ा शर्माती
कभी जाती दूर, कभी पास आती
हौले से छू लूँ तुझे, दिल कह रहा था
सोते हुए ही सही, सपना सच हो रहा था
निभा दूँ वो वादा जो तुझसे किया था
लुटा दूँ वो जीवन, जो तुझमें जिया था
तेरे हांथों को छूकर, जहाँ मिल गया था
मेरा साथ तुझसे सदा जुड़ गया था
तेरे हांथों की मेहँदी सुकून लग रही थी
तेरे माथे की बिंदिया क्या कहूँ लग रही थी
चूड़ियों की खनखन में संगीत घुला था
तेरा साथ पाकर मैं पूरा हुआ था
सपनों की बातें तो सच भी हैं होती
बिन सपनों की दुनिया अधूरी ही होती
ये रात, काश थोड़ी लम्बी सी होती
ये सपना न होता, तू मेरी ही होती
कल रात मैंने एक सपना देखा
तुझे होता मैंने अपना देखा

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